Thursday, June 9, 2011

गीत चित्रा सिंह


दिल के उजले कागज पे हम कैसा लिखे
बोलो तुमको गैर लिखे या अपना मीत लिखे
नीले अम्बर की अमराई मैं तारो के फूल
मेरे प्यासे होंठो पर है अंगारों के फूल
इन फूलों को आखिर अपनी हार या जीत लिखे
बोलो तुमको गैर लिखे या अपना मीत लिखे

कोई पुराना सपना दे दो औए कुछ मीठे बोल
लेकर हम निकले हैं अपनी आँखों के कश्कोरे
हम बंजारे प्रीत के मरे क्या संगीत लिखे
बोलो तुमको गैर लिख्रे या अपना मीत लिखे

शाम खड़ी है ले चमेली के प्याले मैं शबनम
जमुना जी की ऊँगली पकडे खेल रहा है मधुबन
ऐसे मैं गंगाजल से राधा की प्रीत लिखे
बोलो तुमको गैर लिख या अपना मीत लिखे
गीत -चित्र सिंह