Tuesday, August 2, 2011

मेरी नाव


आज फिर बारिश की बूंदों मैं
मन बह जाने को करता है
बच्चों के छपाक की आवाज़ है
कागज़ की वो नावे ,,,,,,,,,,,,,,,,
मधु मालती की लताये भी कही दबी छुपी
अपनी कहानी कह रही हैं ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
भागम भाग है जिंदगी की ,,,,,,,,,,,,,,,,
कागज़ की रगीन नाव आज भी याद है ,,,,,,,,,,,
ज़रा सी फटने पे कितना दर्द होता था मन को ,,,,,,,,,,, ,,
आज जिंदगी नाव खेते खेते थकन सी होती है ,,,,,,,,,,,,,,
कभी बारिश मैं चलने को तैयार ,,,,
कभी
बेचारी उदास एक कोने मैं मुह
छुपाये ,,,किसी का इंतज़ार करती है ,,,,,,,,,
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मेरी नाव