
अब तो इज़ाज़त देदो जाने की
स्वछन्द गगन मैं उड़ने की
चिरियों की बोली मैं बोलूँ
फूलों से कुछ बात कहू
कुछ उनकी सुनूँ कुछ अपनी कहूं
अब तो इज़ाज़त दे दो जाने की
सुनहरी धूप तल्ले नंगे पांव मैं
एक बार फिर से खेल सकूं ,,
बारिश की बूंदों मैं अंपनी नाव चला सकूं
अब तो इज़ाज़त दे दो जाने की
असीमित सी हो उल्लासित सी जोगन सी हो
हर सीमारेखा से पार जा कर खुद को ढूंढ सकूं
बस इज़ाज़त देदो जाने की
स्वछन्द गगन मैं उड़ने की
चिरियों की बोली मैं बोलूँ
फूलों से कुछ बात कहू
कुछ उनकी सुनूँ कुछ अपनी कहूं
अब तो इज़ाज़त दे दो जाने की
सुनहरी धूप तल्ले नंगे पांव मैं
एक बार फिर से खेल सकूं ,,
बारिश की बूंदों मैं अंपनी नाव चला सकूं
अब तो इज़ाज़त दे दो जाने की
असीमित सी हो उल्लासित सी जोगन सी हो
हर सीमारेखा से पार जा कर खुद को ढूंढ सकूं
बस इज़ाज़त देदो जाने की
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