Friday, March 16, 2012

ये जीवन


एक रंगमंच ही तो है ये जीवन ,,
हर रोज रूप बदल सामने आता है ये जीवन
नवसृजन में अपना तन मन अर्पण करता है ये जीवन
कल्पनाओ को सतह पे लाता है ये जीवन ,,,,,
सुख में दुःख में सम रहने की कोशिश करता हे ये जीवन
अवशेषों को तलहटी में रोज डालता हे जीवन ,,,,,
कभी खज़ाना सा लगता है ,,कभी सूना सा ये जीवन ,,,,
हर रिश्ते को एक डोर में कभी बांधता है जीवन ,,,,
एक आशा और निराशा का बंधन तो है ये जीवन .....
कभी छल कभी द्वेष कभी प्रेम सा है जीवन,,,,,
कभी चतुर्थी का चाँद है तो कभी अमावस्या की रात है जीवन ,,,,,,
कभी खिलखिलाता कभी मुंह छुपाता है ये जीवन,,,,,,,,,,,,,
मुझे तो हर पल अबूझ पहेली सा जन परता है ये जीवन

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